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Monday, March 2, 2026

फ़िल्मी गानों की तकती - :बहर: पार्ट -11

 212 12 212 12

मुतदारिक मुरब्बा मुख़ला मुज़ाफ़

1) वक़्त ने किया क्या हसीं सितम

(वक़्त-ने / कि-या / क्या-ह-सीं / सि-तम)

Friday, June 4, 2021

तकती: तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा, तेरे सामने मेरा हाल है

 बहुत ही मुश्किल औऱ बेहतरीन बह्र । सीखने वालों को काफी मदद मिल सकती है इसे अपनी कलम में ज़रूर उतारनी चाहिए ।

★★★★★★★★★★★★★★

बहरे कामिल मुसम्मन सालिम

11212 11212 11212 11212

मेरी पसंदीदा बह्र औऱ गीत ।

★★★★★★★★★★★★★★

फ़िल्म आखरी दांव का जिसके गीतकार मजरुह सुलतानपुरी, गाया है रफ़ी साहिब ने, संगीत दिया है मदन मोहन जी ने । 

◆◆◆◆

बोल हैं::


तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा, तेरे सामने मेरा हाल है

तेरी एक निगाह की बात है, मेरी जिंदगी का सवाल है


मेरी हर खुशी तेरे दम से है, मेरी जिंदगी तेरे गम से है

तेरे दर्द से रहे बेख़बर, मेरे दिल की कब ये मजाल है


तेरे हुस्न पर है मेरी नज़र, मुझे सुबह शाम की क्या खबर

मेरी शाम है तेरी जुस्तजू, मेरी सुबह तेरा ख़याल है


मेरे दिल जिगर में समा भी जा, रहे क्यो नज़र का भी फासला

के तेरे बगैर तो जान-ए-जां, मुझे जिंदगी भी मुहाल है


◆◆◆◆


इसी बह्र पर दूसरा गीत::


मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है 


सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है 

◆◆◆◆

Sunday, August 30, 2020

तकती-देखती ही रहो आज दर्पण न तुम

मेरे पसंदीदा गायक #मुकेश जी ,और उस पर लीरिक्स गोपाल दास नीरज जी के...सोने पे जैसे सुहागा ।
इस क्रम में आज फिर एक नायाब नगमा लेकर आया हूँ। आइये उसकी  बह्र ऒर तकती देखें ।  1965 में रिलीज हुई फिल्म- ‘नई उमर की नई फसल’ के लिए नीरज जी के ख्यालों से निकला यह गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे मुकेश जी ने संगीतकार रोशन जी के संगीत निर्देशन में, बेहद खूबसूरत तरीके से गाया, जिसमें गीतकार नीरज जी ने सौंदर्य को बहुत सुंदर तरीके से इस गीत में पिरोया है ऒर मुकेश जी ने अपनी खूबसूरत आवाज़ में इसे निभाया है :---

★★★★★★★★★
बह्र-
बहरे-मुतदारिक मसम्मन सालिम
◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तकती:-
212 212 212 212
 ◆◆◆◆◆◆◆◆◆

देखती ही रहो आज दर्पण न तुम
प्यार का ये महूरत निकल जाएगा, निकल जाएगा

साँस की तो बहुत तेज़ रफ़्तार है
और छोटी बहुत है मिलन की घड़ी
गूँथते गूँथते ये घटा साँवरी
बुझ न जाये कहीं रूप की फुलझड़ी
चूड़ियाँ ही न तुम–
चूड़ियाँ ही न तुम खनखनाती रहो
ये शरमसार मौसम बदल जायेगा, बदल जायेगा।

सुर्ख होंठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी
जैसे शबनम अँगारों की मेहमान हो
जादू बुनती हुई ये नशीली नज़र
देख ले तो ख़ुदाई परेशान हो
मुस्कुराओ न ऐसे —
मुस्कुराओ न ऐसे चुराकर नज़र
आइना देख सूरत मचल जायेगा, मचल जायेगा।

चाल ऐसी है मदहोश मस्ती भरी
नींद सूरज सितारों को आने लगे
इतने नाज़ुक क़दम चूम पाये अगर
सोते सोते बियाबान गाने लगे
मत महावर रचाओ–
मत महावर रचाओ बहुत पाँव में
फ़र्श का मरमरी दिल दहल जायेगा, दहल जायेगा


देखती ही रहो आज दर्पण न तुम।
★★★★★★★★★★

हर्ष महाजन

Thursday, October 4, 2018

तकती: होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा

दोस्तो,
इसी कड़ी में एक और गीत:

#जिसकी बह्र और तकती:

बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़
2122-1122-1122-22
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 जिसे जब भी मैं सुनता हूँ मेरी रूह तक कांप जाती है । देशभक्ति का  प्रेम से सराबोर मगर दर्द से भरा "हकीकत" फ़िल्म का ये गीत ,संगीतकार : मदन मोहन बोल दिए हैं गीतकार : कैफ़ी आज़मी साहब ने और
गायक हैं: भूपिंदर,  मोहम्मद रफ़ी, तलत महमूद-मन्ना डे
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 होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दवा जानके खाया होगा
होके मजबूर...

भूपिंदर: दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे
अश्क़ आँखों ने पिये और न बहाए होंगे
बन्द कमरे में जो खत मेरे जलाए होंगे
एक इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा

रफ़ी: उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी
दिल की लुटती हुई दुनिया नज़र आई होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी
हर तरफ़ मुझको तड़पता हुआ पाया होगा
होके मजबूर...

तलत: छेड़ की बात पे अरमाँ मचल आए होंगे
ग़म दिखावे की हँसी ने न छुपाए होंगे
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आए होंगे - (२)
सर न काँधे से सहेली के उठाया होगा

मन्ना डे: ज़ुल्फ़ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी
और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी
बिजली नज़रों ने कई दिन न गिराई होगी
रँग चहरे पे कई रोज़ न आया होगा
होके मजबूर...

*****

Wednesday, October 3, 2018

तकती : ठहरिए होश में आलूँ तो चले जाइयेगा ।

दोस्तो आज उसी बह्र का ज़िक्र मैं दुबारा करूँगा जिसका जिक्र मैंने पिछले गीत में किया था ।

"पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी"
इसकी बह्र: और तकती

बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़

फ़ाइलातुन,  फ़इलातुन,  फ़इलातुन,  फ़ेलुन
 2122,        1122,       1122,        22(112)
इस बहर में  22 की जगह 112 भी इस्तेमाल हो सकता है
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इस गीत में हमने गीत की तकती यूँ की :-

2122 1122 1122 22

लेकिन इस बह्र के गीतों में कई बार आखिरी शब्द की तकती में (22) की जगह (112) भी इस्तेमाल होता है ।

ये बात practically समझाने के लिए एक ही गीत में जहां दोनों अरकान इस्तेमाल हुईं हैं वही  गीत यहां पेश किया है । उम्मीद है अब ये बह्र अच्छे से समझ में आएगी ।

आइए देखिए :

फ़िल्म: "मुहब्बत इसको कहते हैं" का ये गीत, मो0 रफ़ी साहब और सुमन कल्याणपुर ने गाया और संगीत दिया है खय्याम साहब ने । गीतकार है मज़रूह सुल्तानपूरी
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मुखड़ा देखिए :

ठहरिये होश में आलूँ तो चले जाइयेगा
आपको दिल में बिठालूँ तो चले जाइयेगा

इसकी तकती:
2122 1122 1122 112

आपको दिल में बिठालूँ.....

अब अंतरा देखिए:

कब तलक़ रहियेगा यूँ दूर की चाहत बनके – 2
दिल में आ जाइये इक़रार-ए-मुहब्बत बनके
अपनी तक़दीर बना लूँ तो चले जाइयेगा

2122 1122 1122 22

आपको दिल में बिठालूँ…

मुझको इक़रार-ए-मुहब्बत पे हया आती है – 2
बात कहते हुए गरदन मेरी झुक जाती है
देखिये सर को झुका लूँ तो चले जाइयेगा
हम्म… हम्म…
देखिये सर को झुका लूँ तो चले जाइयेगा
हाय, आपको दिल में बिठालूँ…

ऐसी क्या शर्म ज़रा पास तो आने दीजे – 2
रुख से बिखरी हुइ ज़ुल्फ़ें तो हटाने दीजे
प्यास आँखों की बुझा लूँ तो चले जाइयेगा
ठहरिये होश में आलूँ तो चले जाइयेगा…

****

अब आप चाहें तो इस गीत को पहले गीत की धुन पर गा सकते हैं ।

"पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी"

Enjoy both the Songs and their tune simultaneously.

Wednesday, April 4, 2018

221-2122-221-2122//2212-122-2212-122

आईये एक और पुराने नग्में की तकती और उसकी बहरउनके अरकान के साथ  देखें :-

फ़िल्म : दोस्त का एक नग़मा, संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, गीतकार : आनंद बक्षी और गायक : किशोर कुमार

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गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है
चलना ही ज़िंदगी है, चलती ही जा रही है ।
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दोस्तो इस नग्मे की बहर दो तरीके से देखी जा सकती है ।
1) 221-2122-221-2122
अरकान : मफ़ऊलू- फ़ाइलातून-मफ़ऊलू- फ़ाइलातून

2) 2212-122-2212-122
अरकान : मुसतफ़इलुन-फ़ऊलुन-मुसतफ़इलुन-फ़ऊलुन

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Friday, March 23, 2018

221 1221 1221 122


शकील बदांयूनी जी का स्वर बद्ध किया, नॉशाद जी का संगीत बद्ध किया और रफी साहब का गाया , एक बहुत ही पुरानी फ़िल्म, मेरे महबूब  का ये गीत और उसकी बहर ::

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ऐ हुस्न ज़रा जाग तुझे इश्क जगाये
बदले मेरी तकदीर जो तू होश में आये
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221 1221 1221 122

बहरे हजज़ मुसम्मन अखरब मकफूफ महजूफ
🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂

Friday, March 16, 2018

2122 1122 1122 22(112)


फिल्मी गानों की तकती बहर पार्ट - 10 में सम्मिकित करने लिए कुछ और गीतों की तकती देखें
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 वज़्न--2122  1122  1122  22(112)

 अर्कान-- फ़ाइलातुन - फ़इलातुन - फ़इलातुन - फ़ैलुन (फ़इलुन)


(अंत में 22 की जगह 112 भी लिया जा सकता है)


🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈

रंग औ नूर की बारात किसे पेश करूँ..
◆ तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है..
◆ आपकी मद भरी आँखों को कँवल कहते हैं..
◆ दिल की आवाज भी सुन मेरे फ़साने पे न जा
◆  वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा दो
◆  ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है
◆  तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी
◆  जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग
◆  कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
◆  कोई फरियाद तेरे दिल में छुपी हो जैसे

🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈

Wednesday, March 14, 2018

2122 1212 22/112



वज़्न-- 2122 1212 22/112
अर्कान--  फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

गीत
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1.  फिर छिड़ी रात बात फूलों की 
2.  तेरे दर पे सनम चले आये 
3.  आप जिनके करीब होते हैं 
4.  बारहा दिल में इक सवाल आया
5.  यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो, 
6.  तुमको देखा तो ये ख्याल आया, 
7.  मेरी किस्मत में तू नहीं शायद 
9.  आज फिर जीने की तमन्ना है 
10. ये मुलाकात इक बहाना है 
11. मै हवा हूँ कहां वतन मेरा 
12. जब भी ये दिल उदास होता है
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1212 1122 1212 22



 वज़्न- 1212 1122 1212 22
 अर्कान--मुफ़ायलुन - फ़इलातुन - मुफ़ायलुन - फ़ैलुन

(इस बह्र में एक छूट भी है और वह यह है कि अंतिम अर्कान '22' (फ़ैलुन) को '112' (फ़यलुन) भी किया जा सकता है)
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इस बह्र पर गीत गुनगुना कर देखें
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1# कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है'
2# किसी की याद सताये शराब पी लेना।
3#न मुँह छिपा के जियो और न सर झुका के जियो।
4#हमें तो लूट लिया मिलके हुस्न वालों ने।

5#झुकी-झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं

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Tuesday, March 13, 2018

121 22 -- 121 22

बहरे-मुतका़रिब मुज़ाहफ़ की 8 में से एक शक्ल
121 22 121 22

🌸 वज़्न-- 121 22 -- 121 22
🌸 अर्कान- फ़ऊन फ़ालुन-- फ़ऊन फ़ालुन
""""""""
1 - जिहाले मस्ती मुकून बरंजिश.......
2- बड़ी वफ़ा से निभाई तूमने......
3- नसीब मे जिसके जो लिखा था.....
4- छुपा लो यू दिल मे  प्यार मेरा....
5- तुम्हारी नज़रों में हमने देखा अजब सी चाहत ....

Thursday, July 20, 2017

2122 2122 2122 212 (बहरे रमल मुसम्मन महजूफ़ )

बहरे रमल मुसम्मन महजूफ़

2122  2122 2122  212

*चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

*दिल के टुकड़े टुकड़े कर के मुस्करा के चल दिए ।

*आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे

*होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है

*यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी

*मंज़िलें अपनी जगह हैं रास्ते अपनी जगह

*सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

*ऐ गम-ए-दिल क्या करूँ ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ |

*चार दिन की चांदनी है फिर अंधेरी रात है  |

*ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े बलम

122-122-122-122 (मुत़कारिब मसम्मन सालिम)


 यह बहर बड़ी ही आसान,सरल,सहज, दिलकश लोक प्रिय , गेय , संगीतमय मारूफ़ और मानूस बह्र है । यही कारण है कि हिन्दी फ़िल्मों में बहुत से गाने इसी बह्र में लिखे गये जो आज भी उतने ही लोकप्रिय कर्णप्रिय  है जितने कल थे ।

*तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं ।

*वो जब याद आये बहुत याद आये।

*उठेगी तम्हारी नज़र धीरे-धीरे ।

*इशारों-इशारों में दिल लेने वाले ।

*तुम्हें प्यार करते हैं करते रहेंगे ।

*अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो ।

*न तुम बे-वफ़ा हो न हम बे-वफ़ा है ।

*हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
     
*मुझे दुनिया वालों, शराबी न समझो

*सितारों के आगे जहां और भी हैं ।

*ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनियां

*मुझे प्यार की ज़िंदगी देने वाले ।

*मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोए ।

*संभाला है मैंने बहुत अपने दिल को ।

*ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी के लो

*जो तुम आ गए हो तो नूर आ गया है

*ये माना मेरी जाँ मुहब्बत जवाँ है ।

*मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू ।

*जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा ।

*जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं ।

*मुबारक हो तुमको समां ये सुहाना ।

*बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा ।




1222-1222-1222-1222 (बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम)

बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम

*बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है,

*ओ लाली फूल सी मेहदी लगा इन गौरे हाथों में

*अरे ओ शौख कलियों मुस्करा देना वो जब आये ।

*मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता ।

*भरी दुनिया में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएं ।

*सुहानी चाँदनी रातें, हमें सोने नहीं देतीं ।

*किसी पत्थर की मूरत से महोब्बत का इरादा है
     
*चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों ।

*ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर , कि तुम नाराज न होना ।

*कभी पलकों में आंसू हैं कभी लब पे शिकायत है |

*ख़ुदा भी आस्मां से जब ज़मीं पर देखता होगा
*ज़रा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाए

*मुहब्बत ही न समझे वो जालिम प्यार क्या जाने |

*हजारों ख्वाहिशें इतनी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले |

*बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं |

*मुहब्बत हो गई जिनको वो परवाने कहाँ जाएँ

*मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता |
   
*सुहानी रात ढल चुकी न जाने तुम कब आओगे

*कभी तन्हाईयों में भी हमारी याद आएगी |

*परस्तिश की तमन्ना है, इबादत का इरादा है |