Friday, March 23, 2018

221 1221 1221 122


शकील बदांयूनी जी का स्वर बद्ध किया, नॉशाद जी का संगीत बद्ध किया और रफी साहब का गाया , एक बहुत ही पुरानी फ़िल्म, मेरे महबूब  का ये गीत और उसकी बहर ::

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ऐ हुस्न ज़रा जाग तुझे इश्क जगाये
बदले मेरी तकदीर जो तू होश में आये
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221 1221 1221 122

बहरे हजज़ मुसम्मन अखरब मकफूफ महजूफ
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Friday, March 16, 2018

2122 1122 1122 22(112)


फिल्मी गानों की तकती बहर पार्ट - 10 में सम्मिकित करने लिए कुछ और गीतों की तकती देखें
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 वज़्न--2122  1122  1122  22(112)

 अर्कान-- फ़ाइलातुन - फ़इलातुन - फ़इलातुन - फ़ैलुन (फ़इलुन)


(अंत में 22 की जगह 112 भी लिया जा सकता है)


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रंग औ नूर की बारात किसे पेश करूँ..
◆ तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है..
◆ आपकी मद भरी आँखों को कँवल कहते हैं..
◆ दिल की आवाज भी सुन मेरे फ़साने पे न जा
◆  वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा दो
◆  ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है
◆  तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी
◆  जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग
◆  कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
◆  कोई फरियाद तेरे दिल में छुपी हो जैसे

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Wednesday, March 14, 2018

2122 1212 22/112



वज़्न-- 2122 1212 22/112
अर्कान--  फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

गीत
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1.  फिर छिड़ी रात बात फूलों की 
2.  तेरे दर पे सनम चले आये 
3.  आप जिनके करीब होते हैं 
4.  बारहा दिल में इक सवाल आया
5.  यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो, 
6.  तुमको देखा तो ये ख्याल आया, 
7.  मेरी किस्मत में तू नहीं शायद 
9.  आज फिर जीने की तमन्ना है 
10. ये मुलाकात इक बहाना है 
11. मै हवा हूँ कहां वतन मेरा 
12. जब भी ये दिल उदास होता है
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1212 1122 1212 22



 वज़्न- 1212 1122 1212 22
 अर्कान--मुफ़ायलुन - फ़इलातुन - मुफ़ायलुन - फ़ैलुन

(इस बह्र में एक छूट भी है और वह यह है कि अंतिम अर्कान '22' (फ़ैलुन) को '112' (फ़यलुन) भी किया जा सकता है)
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इस बह्र पर गीत गुनगुना कर देखें
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1# कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है'
2# किसी की याद सताये शराब पी लेना।
3#न मुँह छिपा के जियो और न सर झुका के जियो।
4#हमें तो लूट लिया मिलके हुस्न वालों ने।

5#झुकी-झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं

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Tuesday, March 13, 2018

121 22 -- 121 22

बहरे-मुतका़रिब मुज़ाहफ़ की 8 में से एक शक्ल
121 22 121 22

🌸 वज़्न-- 121 22 -- 121 22
🌸 अर्कान- फ़ऊन फ़ालुन-- फ़ऊन फ़ालुन
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1 - जिहाले मस्ती मुकून बरंजिश.......
2- बड़ी वफ़ा से निभाई तूमने......
3- नसीब मे जिसके जो लिखा था.....
4- छुपा लो यू दिल मे  प्यार मेरा....
5- तुम्हारी नज़रों में हमने देखा अजब सी चाहत ....

Thursday, July 20, 2017

2122 2122 2122 212 (बहरे रमल मुसम्मन महजूफ़ )

बहरे रमल मुसम्मन महजूफ़

2122  2122 2122  212

*चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

*दिल के टुकड़े टुकड़े कर के मुस्करा के चल दिए ।

*आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे

*होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है

*यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी

*मंज़िलें अपनी जगह हैं रास्ते अपनी जगह

*सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

*ऐ गम-ए-दिल क्या करूँ ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ |

*चार दिन की चांदनी है फिर अंधेरी रात है  |

*ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े बलम

122-122-122-122 (मुत़कारिब मसम्मन सालिम)


 यह बहर बड़ी ही आसान,सरल,सहज, दिलकश लोक प्रिय , गेय , संगीतमय मारूफ़ और मानूस बह्र है । यही कारण है कि हिन्दी फ़िल्मों में बहुत से गाने इसी बह्र में लिखे गये जो आज भी उतने ही लोकप्रिय कर्णप्रिय  है जितने कल थे ।

*तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं ।

*वो जब याद आये बहुत याद आये।

*उठेगी तम्हारी नज़र धीरे-धीरे ।

*इशारों-इशारों में दिल लेने वाले ।

*तुम्हें प्यार करते हैं करते रहेंगे ।

*अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो ।

*न तुम बे-वफ़ा हो न हम बे-वफ़ा है ।

*हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
     
*मुझे दुनिया वालों, शराबी न समझो

*सितारों के आगे जहां और भी हैं ।

*ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनियां

*मुझे प्यार की ज़िंदगी देने वाले ।

*मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोए ।

*संभाला है मैंने बहुत अपने दिल को ।

*ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी के लो

*जो तुम आ गए हो तो नूर आ गया है

*ये माना मेरी जाँ मुहब्बत जवाँ है ।

*मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू ।

*जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा ।

*जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं ।

*मुबारक हो तुमको समां ये सुहाना ।

*बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा ।